खोजती हूं।
पुरानी तस्वीरों में, किताबो के लकीरों में,
खतों के पीले पन्नों में, तुम्हे खोजती हूं।
वो अल्फाज जो तुम्हारे सीने में न धड़के ,
उन्हें स्याही में डुबोने की कारण खोजती हूं।
वो एहसास जो तुम्हारे सांसों से न महके,
उसे जगाए रखने की वजह खोजती हूं।
वो सपने जो हम कभी साथ देख न पाए,
उन सपनों में रात गुजर क्या खोजती हूं ?
चादर की सिलबटो में, जुल्फों की रेशों में,
शायद छुपा हो कोई पैगाम, मैं खोजती हूं।
वो डोली जो तुम्हारे दहलीज तक न पहुंचे,
उस डोली में बैठने का अंजाम खोजती हूं।
मै अपने खामोशी में, एक लाचार दिल की,
टूटने की झंकार खोजती हूं।
जो चार दीवारों में तुम मुझे न मिले ,
तो बेशर्म, बेहया, मैं तुम्हे खुले बाजार
खोजती हूं ।